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"नीतीश का दिल्ली रुख, बिहार में नई राजनीति: एनडीए फॉर्मूले और नए मुख्यमंत्री की खोज"

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पटना: बिहार की राजनीति में लगभग दो दशक तक राज्य की सत्ता के केंद्र में रहने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब नई राजनीतिक राह पर कदम बढ़ाने जा रहे हैं। राज्यसभा के लिए नामांकन के बाद माना जा रहा है कि वे अप्रैल के पहले हफ्ते तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, क्योंकि वर्तमान राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। इसके बाद नीतीश कुमार केंद्रीय राजनीति में अपनी नई भूमिका निभाएंगे और बिहार में सत्ता का नया समीकरण बनने जा रहा है।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, एनडीए के अंदर नए फॉर्मूले पर चर्चा तेज हो गई है और मौजूदा समीकरणों के आधार पर यह संभावना जताई जा रही है कि इस बार राज्य में मुख्यमंत्री भाजपा से होगा। भाजपा के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय के नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में हैं।
जेडीयू के नेतृत्व वाले हिस्से को संतुलन में रखने के लिए गठबंधन की नई कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री का पद दिया जा सकता है। चर्चा है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को इस पद के लिए प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अलावा, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के हिस्से से भी उपमुख्यमंत्री बनने की संभावना बताई जा रही है, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार, मुख्यमंत्री का इस्तीफा राज्यपाल को सौंपने के बाद मंत्रिपरिषद स्वतः समाप्त मानी जाएगी। इसके बाद राज्यपाल बहुमत रखने वाले दल या गठबंधन के नेता को सरकार बनाने का आमंत्रण देंगे। इस प्रक्रिया में विधायक दल का नेता चुना जाएगा और शपथ ग्रहण के बाद नई मंत्रिपरिषद का गठन होगा। नई सरकार को विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा, यदि आवश्यक हुआ तो फ्लोर टेस्ट कराया जा सकता है। एनडीए के पास पर्याप्त संख्या होने के कारण बहुमत साबित करना अपेक्षाकृत आसान होगा।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से बिहार में एक नया राजनीतिक अध्याय शुरू होने जा रहा है। लंबे समय तक राज्य की सत्ता का चेहरा रहे नेता के दिल्ली की राजनीति में कदम रखने से राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ेगी। अब सबकी नजर एनडीए के फाइनल फॉर्मूले पर टिकी है कि बिहार का नया मुख्यमंत्री कौन होगा और कैबिनेट के नए स्वरूप का निर्णय कब तक आएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव से बिहार में नई राजनीतिक पीढ़ी और गठबंधन की दिशा तय होगी।

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